Gangubai | Madam of Kamathipura

Gangubai Kathiyawadi | गंगूबाई कोठेवाली | गंगा हरजीवनदास कठियावाली | पति ने महज ₹500 बेच दिया था

दोस्तों कुछ दिनों से आप गंगूबाई को के बारे में हर जगह सुन रहे हैं, गंगूबाई कोठेवाली की चर्चा जोरों पर तब आई।  जब हमारे निर्देशक  संजय लीला भंसाली Gangubai Kathiawadi के जीवन पर एक फिल्म बना रहे हैं जिसमें अभिनेत्री आलिया भट्ट मुख्य भूमिका में हैं।

यह फिल्म S. Hussain Zaidi की किताब ‘Mafia Queens of Mumbai’ जो कि गंगूबाई  के जीवन में आए उतार-चढ़ाव और दुख भरी दास्तां को बयां करता है।

गंगूबाई ने किस तरह अपने जीवन में वेश्यावृत्ति से पीडित और अनाथ बच्चों के लिए किए गए उनके कार्य के बारे में भी बताता है।

 गंगू बाई कौन थी

गंगूबाई का पूरा नाम गंगा हरजीवनदास, का जन्म 1939 में काठियावाड़, गुजरात में हुआ था।एक अच्छे परिवार से ताल्लुक रखने वाली  और अपने पिता की लाडली इकलौती लड़की थी।

उन्हें युवावस्था में अभिनेत्री बनने का बहुत शौक था, लेकिन दुर्भाग्य से वह अभिनेत्री बनने का सपना पूरा नहीं कर पाई। महज 16 वर्षों की गंगा को मुंबई में एक्टर बनने के बड़े-बड़े सपने दिखाकर रमणिकलाल ने उसे अपने प्यार के जाल में फंसा कर शादी कर ली। 

28 वर्षीय रमणिकलाल, गंगा के पिता के यहां अकाउंटेंट के रूप में काम करते थे। घरवालों को यह रिश्ता मंजूर ना होने पर वह दोनों मुंबई की ओर भाग गई। 

 गंगूबाई के कोठे तक का सफर

गंगूबाई का सपनों की नगरी में आकर उनके सारे सपने बिखर गए । हालांकि उनका रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चल सका, क्योंकि रमणीक लाल एक अच्छे किरदार का व्यक्ति नहीं था।

उसने अपनी पत्नी को महज 500 रुपए के लालच में वेश्यालय में भेज दिया, इस तरह से वह जबरदस्ती वेश्यालय (कोठे) में आयीं।

कई दिनों तक अपने गम में डूबे होने और बेपनाह रोने के बाद, उस लड़की ने यह जान लिया था कि अब वह इस दलदल में आ चुकी है और उसने वहां रुकने का फैसला किया और वेश्यावृत्ति का जीवन स्वीकार कर लिया।

16 साल की आयु में वेश्यावृत्ति को स्वीकार करने के कारण वह बहुत ही कम समय में बहुत ही महंगी वेश्या बन चुकी थी इनके लिए कई बड़े बड़े सेठ अपने पैसे लुटाने को तैयार खड़े रहते थे।

Gangubai | Madam of Kamathipura

कैसे आई कमाठीपुरा की कमान गंगूबाई के हाथों

मुंबई में साठ के दशक में तीन मुख्य माफिया होते थे, जिनमें से एक माफिया डॉन करीम लाला थे।जब एक बार उनके गिरोह के एक सदस्य ने उनका बलात्कार किया था।

इसका न्याय मांगने के लिए वह डॉन करीम लाला के पास गई थी।  गंगूबाई ने करीम लाला को राखी बांधकर, उन्हें अपना भाई बना लिया था।

गंगूबाई, करीम लाला की मुँह बोली बहन बन गई थी, और करीम लाला के समर्थन होने से वह बहुत शक्तिशाली भी हो गई, करीम लाला ने ‘कमाठीपुरा’ की कमान गंगूबाई को दे दी थी।  उन्होंने शहर में कई सारे वेश्यालय बनाए और उनका संचालन भी करने लगी  थी।

“Black Bentley Car” की मालकिन

हालांकि मुंबई की माया नगरी में मर्दों का राज किया मगर, कुछ महिलाएं भी थी जिन्होंने अपना नाम खूब चमकाया।

जिनमें से एक थी गंगूबाई, जिस्मफरोशी की दुकानों पर उनका नाम आज बड़ी इज्जत से लिया जाता है।

साठ के दशक में वह एकमात्र वेश्यालय की मालकिन थी, जिनके पास  Black Bentley Car थी, जिनसे वह आना-जाना कर दी थी।

कमाठीपुरा कि वह बहुत शक्तिशाली महिला थी  उनको ‘कमाठीपुरा की मैडम ‘ (Madam of Kamathipura) नाम से जानी जाने लगी थी।

वेश्या बाजार हटाने की मुहिम के खिलाफ नेतृत्व किया

जब मुंबई से वेश्या बाजार हटाने के खिलाफ आंदोलन के शुरू हुआ, तब इसका नेतृ्त्व खुद गंगूबाई ने किया।

इस मुहिम को लेकर उस समय के तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू जी से भी मुलाकात की और वेश्यावृत्ति में लिप्त महिलाएं के हालत एवं अनाथ बच्चों के बेहतरी करण के बारे में बात की बात रखी थी।

जबकि वह खुद एक ‘माफीया क्वीन’ थीं। लेकिन उन्होंने वश्यशाए कि महिलाओं की हालत सुधारने के खिलाफ, और अनाथ बच्चो के बेहतरी करण के बारे में, जो कदम उठाए।

उनकी वजह से आज भी वहा के लोग याद किया जाता है। आज भी कमाठीपुरा के इलाक़े में उनकी मूर्ति लगी है, साथ ही इलाके में कई जगह उनकी तस्वीरें भी दीवार पर लगी दिखती हैं। आज भी गंगुबाई को वहां के लोग भगवान की तरफ पूजा जाता है।

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